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अंधेरा -30-Jul-2024

प्रतियोगिता हेतु 
दिनांक: 30/07/२०२४
वार

अंधेरा (नज़्म) 

यूं घुटन सी क्यों होने लगी है,,
मुझे....
मेरे अपने ही घर में?
अंधेरा सा क्यूं लगने लगा है,,
मुझे... 
मेरे अपने ही घर में?
मन परेशान सा है, 
उदासी छा रही है चारों तरफ़। 
कुछ भी साफ 
दिखाई नहीं दे रहा है।
यूं घुटन सी क्यों होने लगी है,,
मुझे
मेरे अपने ही घर में?

शायद यहां मेरा कुछ नहीं, 
कहा तो यही जाता है।
कोई मेरा अपना नहीं, 
माना भी यही जाता है।
नारी का घर कौन सा 
क्या कोई बता सकता है?
मायका या ससुराल ?
क्या कोई कुछ कह सकता है?
यूं घुटन सी क्यों होने लगी है,,
मुझे....
मेरे अपने ही घर में? 

अंधेरा बढ़ता जा रहा निरंतर, 
निकलने का रास्ता सुझाई नहीं देता।
सब हैं यहां आसपास पर,
 इनमें कोई अपना दिखाई नहीं देता।
अकेलापन सा छाने लगा है
तन्हा मुझे कर रहा है।
यूं घुटन सी क्यों होने लगी है,,
मुझे...
मेरे अपने ही घर में?

शाहाना परवीन 'शान'...✍️ 
मुजफ्फरनगर 





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